Kyphoplasty: स्पाइनल ओस्टेपोरोसिस का इलाज कायफोप्लास्टी


एक उम्र के बाद रोजाना का क्रम हो जाता है 'ऊ. यह कराह बनावटी नहीं स्वाभाविक है, जो उम्र के एक पायदान बाद स्वतः प्रस्फुटित होती है। वजह कुछ भी हो सकती है। खानपान में कैल्शियम की कमी या जीवनशैली।


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Kyphoplasty Spinal Osteoporosis Ka Ilaj
स्पाइनल ओस्टेपोरोसिस का इलाज कायफोप्लास्टी

हम सभी वाकिफ हैं कि हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम की सख्त जरूरत रहती है। लेकिन इसे जानने के बावजूद अधिकांश लोग कैल्शियम का पर्याप्त सेवन नहीं करते हैं। खास करके महिलाओं में तो इसकी बहुत ही कमी पाई जाती है। 


सामाजिक व आर्थिक कारणों की वजह से वह अपने आपको दूध और उससे बने पदार्थ, अंडे तथा अन्य कैल्शियम युक्त पदार्थ से वंचित रखती है। इससे हड्डियां छोटी उम्र में कमजोर हो जाती हैं, बहुत सी महिलाएं हड्डियों से जुड़ी एक आम बिमारी स्पाइनल ओस्टेपोरोसिस की शिकार हो जाती है। इसमें अपने खुद के वजन से हड्डियां टूट जाती हैं। यही नहीं असहनीय दर्द की वजह से आम जीवन निर्वाह कठिन हो जाता है।


हमारे देश में हमेशा से ही लड़कियों के साथ भेद भाव होता रहा है। अधिकांशतः उन्हें न ढंग से खाना मिलता है और न ही उनकी देखभाल की जाती है। पौष्टिक खाना न खाने के कारण उनकी हड्डियां मजबूत नहीं होती। नतीजतन आगे चल कर जब वह अपना परिवार बढ़ाने का सोचती हैं तो उन्हें बहुत मुश्किल होती है। पहले से कमजोर हड्डियां बच्चे के भार के कारण और कमजोर हो जाती हैं। 


गर्भावस्था के दौरान शरीर में बहुत से परिवर्तन होते हैं। इससे शरीर में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी की मात्रा घट जाती है। इसका विपरीत असर हड्डियों पर पड़ता है। यानी वह कमजोर हो जाती हैं।


हमारे देश में अधिकतम महिलाओं का तबका शाकाहारी है। ऐसे में कैल्शियम और प्रोटीन का केवल एक ही स्त्रोत है - दूध और इससे बने पदार्थ। मगर महिलाएं इसका कम सेवन करती हैं। पौष्टिक खाने का सेवन न करने के कारण महिलाएं मोटापे की शिकार भी हो रही हैं जिससे कि हड्डियां जो पहले से ही कमजोर होती हैं और कमजोर हो जाती हैं। 

40 साल की तरफ आते ही शरीर में हारमोनल बदलाव होते हैं और मोटापा होने के कारण यह सब हड्डियों पर बहुत असर करती है, जिससे कि वह खोखली हो जाती हैं। यही स्पाइनल ओस्टेपोरोसिस के पहले लक्षण होते हैं। स्पाइनल ओस्टेपोरोसिस बड़ी उम्र की महिलाओ में काफी देखा जाता है। कारण स्पाइन की हड्डियां शरीर का ज्यादा से ज्यादा बोझ उठाती हैं।


यह सब काफी हद तक रोका जा सकता है अगर हम बचपन से ही लड़कियों को पौष्टिक आहार दें। साथ ही उन्हें व्यायाम करने हेतु उत्साहित करें। सिर्फ घर के काम में ही न सीमित रखें। गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद व्यायाम बहुत जरूरी होता जाता है। कारण इस समय हड्डियों पर बहुत असर पड़ता है अतः हमें सिर्फ आराम ही नहीं करना चहिए। मोटापा हर बीमारी की जड़ है, इससे बच के रहने में ही भलाई है।


वे लोग जिनकी वेर्तिबा कंप्रेस हो गई है या फिर पैरों में भारीपन, सुन्नपन या जकड है या कैफोसिस से पीडित हैं। इन्हें आधुनिक चिकित्सा पद्धति, कायफोप्लास्टी के जरिए दुरुस्त किया जा सकता है।

> डॉ. सुदीप जैन, कंसल्टेंट स्पाइन सर्जन, 

फोर्टिस नई दिल्ली



वैसे तो अधिकतर पीड़ित महिलाएं इस बीमारी से प्रारंभिक उपचार से निदान पा सकती हैं परंतु फिर भी ऐसे मरीज होते हैं, जिन्हें अलग इलाज की जरूरत होती है। वह लोग जिनके पैरों में भारीपन, सुन्नपन या जकड़न है उनको भी आज की आधुनिक चिकित्सा से पूरे रूप से ठीक किया जा सकता है। इन्हें एक ऐसी आधुनिक पद्धति जिसे कायफोप्लास्टी के नाम से जाना जाता है के तहत उपचार दिया जाता है।


कायफोप्लास्टी की प्रक्रिया के अंतर्गत एक्सरे मशीन से देखते हुए सूक्ष्म माइक्रोस्कोपिक नीडल को पीड़ित या विकारग्रस्त वेर्तिबा में डालते हैं। इस तकनीक से किया हुआ इलाज शत प्रतिशत कारगर और सफल है। मरीज अपनी सामान्य दिनचर्या को तुरंत ही शुरू कर सकते हैं इसमें किसी भी बेडरेस्ट की जरूरत नहीं है। इस प्रक्रिया को करने में केवल 10 मिनट का समय लगता है, जिसका लाभ पीडित जीवन भर उठा सकता है।

यह कहना सही होगा कि कायफोप्लास्टी एक जादू की छड़ी की तरह ही काम करती है।


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Team: VARNAKSHAR