13 Bimariyon Ke Achuk Ayurvedic Upchar: आयुर्वेदिक इलाज

छोटा रोग हो या बड़ी व्याधि, जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक पौधों में है हर मर्ज की दवा। इसी असर को देख-समझकर वैद्य-हकीमों ने इन्हें अपनाया व रोगग्रसित व्यक्तियों को ठीक किया। कम खर्चीला, सरल, सर्वसुलभ व हानिरहित भी है आयुर्वेद।

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Samanya Rog Ke Asan Gharleu Upchar

13 Bimariyon Ke Achuk Ayurvedic Upchar
बीमारी ठीक करने आयुर्वेदिक अचूक सूत्र

गले की व्याधियां- 

मुलेहठी के चूर्ण को ताम्बूल (पान) के पत्ते में रखकर दांतों में दबाकर चूसते रहें। इससे गला खुलने के साथ-साथ गले का दर्द भी जाता रहता है।


कफ बुखार- 

इस रोग से राहत पाने के लिए मदार के पके पत्ते (कोपलें) आग में जलाकर भस्म कर लें। 490 मिलीग्राम भस्म शहद में मिलाकर सवेरे-शाम सेवन करने से कफ-ज्वर ठीक हो जाता है। मदार को अर्क, अकवन आदि नामों से भी जानते हैं।


उदर में दाह- 

उदर में दाह हो तो श्वेत चंदन घिसकर 20 ग्राम के करीब नाभि में डाल दें। समस्त काया में जलन (दाह) हो तो नाभि पर कांसे की कटोरी रखकर सिकाई करने से दस मिनट में जलन का शमन होता है।


मलेरिया बुखार- 

इस रोग को खत्म करने में तुलसी का विशेष योगदान है। काली तुलसी के 11 पत्ते एवं 11 काली मिर्च का क्वाथ (काढा) बुखार आने तक तथा खत्म होने की अवस्था में सेवन करते रहें। अपामार्ग (लटजीरा) की मूल रेशम के कपड़े से भुजा पर बांधे। प्रतिदिन 10 पत्ते तुलसी के तथा 12 काली मिर्च के साथ इस्तेमाल करें। आराम मिलेगा।


उदर फूलना- 

5 ग्राम अजवायन तथा एक ग्राम नमक मिश्रित कर सेवन करें।


मंदाग्नि- 

भुनी हुई हींग और सेंधा नमक दोनों की एक-एक ग्राम मात्रा रोजाना भोजन के कुछ पहले थोड़ा-सा अदरक-नमक के साथ लें।


पेट में कीड़े-

5 ग्राम वायविडंग के चूर्ण को 5 ग्राम मधु के साथ लें अथवा नीम की पत्तियों का स्वरस पी लें।


अर्श-

खूनी अर्श (बवासीर) में दूब का रस 50 ग्राम चीनी मिलाकर अथवा नागकेसर 10 ग्राम शक्कर में मिश्रित कर पीस लें तथा उसका सेवन करें।


दमा- 

100 ग्राम अलसी (तीसी) को भूनकर उसमें 5 ग्राम पिसा हुआ गोद डालकर मधु में मिलाकर अग्नि पर पका लें। दिन में 4 बार सेवन करें। आलू न खाएं।


सर्दी- 

जरा-सा कपूर खाना और सूंघना चाहिए।


श्वास- 

पीपल की छाल का चूर्ण या कत्था (खैर) की लकड़ी का चूर्ण छ: ग्राम को एक ग्राम मधु के साथ सेवन करें। संयम और एहतियात से जीवनचर्या निभाएं।


हिचकी तथा मूर्छा- 

पांच-सात काली मिर्च सुई की नोक में पिरोकर मरीज की नाक में उसका धुआं दें।


बहुमूत्र- 

पुराने गुड के साथ काले तिल भूनकर ला बना लें। प्रतिदिन दो खाने से बहुमूत्रता की व्याधि नष्ट होती है।


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Team: VARNAKSHAR